कुछ नगमे .... उनकी आवारगी में ...
मोहब्बत की बनी बुनियाद पर , चलता रहा हरदम , कोई दिलवर नहीं मिलता , यही कहता रहा हरदम | तुम्हारे इश्क की खामोशियाँ , सहना गवारा है , गवारा है नही मुझको , अभी चुपचाप यूँ हरदम | हुस्ने - गुलशन की खुशबू में , मैं अक्सर डूब जाता हूँ , तुम्हारी मुस्कुराहट...
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Ravi Shankar Sharma
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[01 Jul 2009 08:01 AM]



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