तुम्हारे नाम…
पत्र जो मन से लिखे जाते हैं वो कहाँ तुम तक पहुँच पाते हैं। पत्र तो बहुत लिखता हूँ पत्र तो रोज लिखता हूँ मगर पत्र जब कागज़ पर लिखता हूँ तब मस्तिष्क नीचे उतर आता है फिर उसी द्वारा पत्र लिखा जाता है मस्तिष्क जो संवेदनहीन होता है मस्तिष्क जो तर्कशील होता...
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ਸ਼ਿਆਮ ਸੁੰਦਰ ਅਗਰਵਾਲ/श्याम सुन्दर अग्रवाल
कविताएँ
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[01 Jul 2009 07:22 AM]



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