अम्मा, ग़रज़ पड़ै चली आओ चूल्हे की भटियारी !

Beyond The Second Sex (स्त्रीविमर्श) एकालाप अम्मा, ग़रज़ पड़ै चली आओ चूल्हे की भटियारी ! दो बेटे हैं मेरे. बहुत प्यार से धरे थे मैंने इनके नाम - बलजीत और बलजोर! गबरू जवान निकले दोनों ही. जब जोट मिलाकर चलते, सारे गाँव की छाती पर साँप लोट जाता. मेरी छातियाँ उमग उमग पड़तीं. मैं बलि बलि जात... [पूरी पोस्ट]
writer कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee
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[01 Jul 2009 03:29 AM]

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