अम्मा, ग़रज़ पड़ै चली आओ चूल्हे की भटियारी !
एकालाप अम्मा, ग़रज़ पड़ै चली आओ चूल्हे की भटियारी ! दो बेटे हैं मेरे.
बहुत प्यार से धरे थे मैंने
इनके नाम - बलजीत और बलजोर! गबरू जवान निकले दोनों ही.
जब जोट मिलाकर चलते,
सारे गाँव की छाती पर साँप लोट जाता.
मेरी छातियाँ उमग उमग पड़तीं.
मैं बलि बलि जात...
[पूरी पोस्ट]
कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee
28
6
0
6
2
[01 Jul 2009 03:29 AM]



Shuffle








