व्यवस्था का डंक और दो टांग के गधे !
कल दफ्तर में सारा दिन मूड ऑफ रहा । इसलिए नहीं कि सुबह उठते ही पत्नी का थोबड़ा देखा था । इसलिए भी नहीं कि दफ्तर आते-आते रोज की तरह पड़ोसन की प्रेम भरी चितवन ने विदा नहीं किया था। इसलिए भी नहीं कि दफ्तर जाते ही दफ्तर में साहब के चरण चाटने पड़े । साहबों का...
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निखिल आनन्द गिरि
Satire
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[01 Jul 2009 02:04 AM]



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