HINDI KAVYA MANCH
फिर वही राज वही काज वही मंहगाई है |हिंद में कठपुतली ने फिर से कुर्सी पाई है ||वही मेडम वही गुड्डा वही है डोर हाथों में |फर्क इतना कि कुछ मजबूती हाथ आई है ||हिंद में रेल समझोते से चली है अब तो |या बिहारी या कि बंगाली ने इसे चलाई है ||खुद पे ज्यादा भरो...
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प्रदीप मानोरिया
sonia gandhi
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[30 Jun 2009 12:19 PM]



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