शु्क्र है फिर भी आये तो...........
देर लगी आने में तुमको, शुक्र है फिरभी आये तो.... तङप रहे थे जिस मौसम को, वो काली बदरा छायी तो। रिमझिम-रिमझिम फुहारों में, ठण्डी पुरवाई है संग..., आओ भीगे इन बूंदो में, खेले बचपन वाले रंग। चहकें चिङिया, मोर नाचते, हम भी होले इनके संग, पैर थिरकते, ताल...
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PREETI BARTHWAL
poetry
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[30 Jun 2009 10:51 AM]



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