ज़माने की नज़र हम पर है ----

Khatti-Meethi........... उसने नज़र से कहा नज़र तुम नज़र नहीं आई नज़र बचाती फिर रही हो क्या किसी और की नज़र में उतर रही हो? नज़र सकुचाई नज़र नहीं मिलाई नज़र झुकाकर बोली ज़माने की नज़र हम पर है नज़र बचाकर आज मैं आई नज़रों - नज़र में हो रही है हमारी - तुम्हारी रूसवाई. इसीलिए मैं नज़र नहीं आई... [पूरी पोस्ट]
writer Ekta
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[30 Jun 2009 08:53 AM]

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