मानसून हो कि बज़ट

परिचर्चा कितना अच्छा होगा जब एक ही किताब पढ़ायी जायेगी दिल्ली से सुदूर गाँव तक. बिजली का क्या है दिल्ली में भी कायम नही रहती. रास्ते में गड्ढे के लिये भी जरूरी नहीं है किसी गाँव मे होना. हस्पताल के दरवाजे पर मरने के लिये कहीं और जाने की जरूरत नहीं. राख़ आँखों... [पूरी पोस्ट]
writer कौतुक [Kaotuka]
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[30 Jun 2009 08:25 AM]

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