यामिनी…
भोर जागने को है,
पर उससे पहले जाग जाती है यामिनी
टूटे सपनों को बुहारती आँगन,
द्वार पूरती चौक हल्दी आटे से
भीगी धोती में,
लातों से झरती ओस
फटकारती है जब जब
फूट पड़ती है किरणे पीली, नारंगी, सुनहरी
और फूट पड़ता है अधर-कलियों से लोक गीत
चकिया की घरर-घरर प...
[पूरी पोस्ट]
satyanshu
9
1
0
1
4
[30 Jun 2009 03:27 AM]



Shuffle








