"बाँध के रखो इन ख्यालो को....कम्बखत आसमां तक उडान भरते है "

DIL KI  BAT राशिद मियां ….तकरीबन ५० साल के है एक रुपये में एक कपडा प्रेस करते है .दस किलोमीटर से साईकिल चलाकर एक दूकान के आगे लकडी के एक तख्त पर ऊपर एक चद्दर तानकर सूरज से लड़ के पिछले बीस सालो से कोयले की प्रेस के संग है .. बचपन की पढाई से यहाँ तक के सफ़र में उ... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ .अनुराग
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[30 Jun 2009 01:50 AM]

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