तेरा आंचल जो ढल गया होता....

संवेदना जून 2009 तेरा आंचल जो ढल गया होता रुख हवा का बदल गया होता देख लेता जो एक झलक तेरी चांद का दम निकल गया होता झील पर खुद ही आ गए वरना तुमको लेने कमल गया होता पी जो लेता शराब आंखों से गिरते गिरते संभल गया होता क्यों मांगते वो आईना मुझसे मैं जो लेकर गज़ल... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल कुमार वर्मा
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[29 Jun 2009 14:03 PM]

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