वह कविता कैसे बनाऊँ मैं
लगे आपको “अप्रतिम”
वह शब्द कहाँ से लाऊँ मैं.
स्वरचित अज्ञान शिविर में
जब तड़प रहा हूँ हर दिन मैं.
अतुल्य लगे जो पाठक को
और जलाये दीप तिमिर में
वह कविता कैसे बनाऊँ मैं.
शब्द नहीं हैं पास मेरे
भाव गये कब के संग छोड़.
लिखना नहीं चाहता हूँ मैं
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कौतुक [Kaotuka]
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[29 Jun 2009 12:04 PM]



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