यह अंधेरे का अध्याय है
यह अध्याय कहीं से भी शुरू हो सकता है क्योंकि यह अंधेरे का अध्याय है जिसकी न कभी कोई शुरुआत थी और न ही कोई अंत दिखाई दे रहा है। इस अध्याय का जन्म ही अंधेरे में हुआ और भविष्य में गढ़े गए कई फ्रेम को चकनाचूर कर गया। जो सपना देखा, गढ़ा वह हकीकत में सांस...
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amlendu asthana
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[29 Jun 2009 10:18 AM]



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