कविता खो गई
कविता खो गई मेरी अपनी जिसे लिखा था मैंने बहुत ही निराले अंदाज में खो गई कहीं कहां ढूंढूं कहां खोजूं किस किताब में दबी होगी किताब में होगी भी, या नहीं कहीं मेरे भीतर ही तो नहीं खो गई पता नहीं क्या सच में मुझसे खो गई या आंख मिचौली खेल रही है पता नहीं...
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मोहन वशिष्ठ
मेरी कविता
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[29 Jun 2009 05:34 AM]



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