कविता खो गई

मोहन का मन कविता खो गई मेरी अपनी जिसे लिखा था मैंने बहुत ही निराले अंदाज में खो गई कहीं कहां ढूंढूं कहां खोजूं किस किताब में दबी होगी किताब में होगी भी, या नहीं कहीं मेरे भीतर ही तो नहीं खो गई पता नहीं क्‍या सच में मुझसे खो गई या आंख मिचौली खेल रही है पता नहीं... [पूरी पोस्ट]
writer मोहन वशिष्‍ठ

मेरी कविता

views
45
upvote
4
downvote
0
rating
4
comments
16
[29 Jun 2009 05:34 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix