पागल

तलाश पागल ना जाने क्यूँ चिड़चिड़ाने लगा है बात बात पर वो बड़बड़ाने लगा हैं। बदलतें इंसानी रिश्तों को देखकर किताबों में वो साथी तलाशने लगा है। लोग दो और दो को पाँच बताते हैं बचपन के कयादे को वो खोजने लगा है। बढ़ती जिम्मेदारियों की तपिश में कोयलें सा काला वो होन... [पूरी पोस्ट]
writer सुशील कुमार छौक्कर
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[29 Jun 2009 00:42 AM]

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