दबे पांव आने दो बदरा...........

MERA SAGAR हे सूरज महाराज...... गर्मी को बरसाओ ना यूं , पत्थर सा सिकवाओ ना यूं , दबे पांव आने दो बदरा, पानी-पानी को तरसाओ ना यूं । ना मुसकाते रहो यूं अकेले, खङी धूप में, बिन सहेले, तुमको होगी कसम चांदनी की, दिन में तारे, दिखलाओ ना यूं , दबे पाव आने दो बदरा, पान... [पूरी पोस्ट]
writer PREETI BARTHWAL

poetry

views
38
upvote
4
downvote
0
rating
4
comments
16
[28 Jun 2009 21:19 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix