दबे पांव आने दो बदरा...........
हे सूरज महाराज...... गर्मी को बरसाओ ना यूं , पत्थर सा सिकवाओ ना यूं , दबे पांव आने दो बदरा, पानी-पानी को तरसाओ ना यूं । ना मुसकाते रहो यूं अकेले, खङी धूप में, बिन सहेले, तुमको होगी कसम चांदनी की, दिन में तारे, दिखलाओ ना यूं , दबे पाव आने दो बदरा, पान...
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PREETI BARTHWAL
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[28 Jun 2009 21:19 PM]



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