कोई पूछे इसके पहले .......

मन वृन्दावन कोई फागुनी गंध तुम्हारी साँसों में भर जाए तो, मेरी सुधियों की थाती को अपनी बांहों में भर लेना बोझिल हो जाएंगी रातें दिन हो जाएँगे आवारा सूनी रातों के सपनों को अपने सिरहाने रख लेना अवश नेह के पागलपन ने कैसा गठबंधन जोड़ा है यह बंधन दुखदाई हो तो सुलह ज़म... [पूरी पोस्ट]
writer Deepa Pant
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[28 Jun 2009 10:40 AM]

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