......और नज्म अडोल खड़ी रह गई

मेरे आस-पास रात जब जाग गई तो ...... अपनी ही लिखी नज्म ...... सिरहाने आन खड़ी हुई ...... नींद से बेजार आंखों ने ...... नज्म के फिक्रे के पीछे .......... छिपे साये को देखा.......... साया चुपचाप ....... गारे के इतिहास में उतर गया ........ दबी यादों को कुरेदने लगा...... [पूरी पोस्ट]
writer MANVINDER BHIMBER
views
30
upvote
5
downvote
0
rating
5
comments
21
[28 Jun 2009 09:54 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix