नज्म अडोल खड़ी रह गई
रात जब जाग गई तो अपनी ही लिखी नज्म सिरहाने आन खड़ी हुई नींद से बेजार आंखों ने नज्म के फिक्रे के पीछे छिपे साये को देखा साया चुपचाप गारे के इतिहास में उतर गया दबी यादों को कुरेदने लगा सिले जख्मों के धागे उसने नज्म के हवाले कर दिये नज्म के होंठों में क...
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MANVINDER BHIMBER
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[28 Jun 2009 09:19 AM]



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