दुनिया के मेले यूँ गए
दुनिया के मेले यूँ गए हमको तन्हाँ छोड़ कर भीड़ के इस रेले में , जैसे कोई अपना न था तन्हाई ले है आई ये हमें किस मोड़ पर खुली आँखों की इस नीँद में , अब कोई सपना न था चाँद माथे रख के टिकुली आ गया दहलीज पर उसके सिवा अब रात का , अपना कोई खुदा न था या खुदा...
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शारदा अरोरा
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[28 Jun 2009 03:58 AM]



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