मैं तो साँवरे के संग राची-कौशिकी चक्रवर्ती.

सुर-पेटी पटियाला घराने की गायकी के अनुगामी पं.अजय चक्रवर्ती की यशस्वी सुर-पुत्री कौशिकी के गले में अपने पिता-गुरू की सारी ख़ूबियाँ मौजूद हैं.वे जब जो गा रहीं है तो अपनी एक विशिष्ट छाप छोड़ देतीं हैं.अल्पायु में ही उन्हें नाम,शोहरत और प्रतिष्ठित मंच मिलने लग गए... [पूरी पोस्ट]
writer संजय पटेल...
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[28 Jun 2009 01:46 AM]

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