ताल ठोंककर कहते-चोरी का माल है

रिपोर्ताज उनका वेश बिल्कुल साधारण होता है। पहली नजर में कोई उन्हें देहाती या फेरी वाले से ज्यादा नहीं समझ सकता। मगर, कंधे पर लटके उनके झोलों में चोरी का माल भरा होता है। एक से एक लुभाने वाला असली सामान। जी हां, ब्रांडेड कंपनियों के कपड़े, साडिय़ां, चादर, घड़ी,... [पूरी पोस्ट]
writer एम. अखलाक

चोरी

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[27 Jun 2009 15:56 PM]

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