जाऍं तो जाऍं कहॉं........
ऐसा लगने लगा है मनुष्य ने जहॉं-जहॉं पॉंव रखा है, वहॉं-वहॉ की प्रकृति नष्ट हुई है। शिमला जाने का मन नहीं करता, न नैनीताल, अब हम प्रकृति के अनछुए प्रदेशों की तलाश में पहाड़ों को रौंद रहे हैं। वहॉं का पर्यावरण पर्याप्त दूषित हो चुका है, हम अपने शहर स...
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जितेन्द़ भगत
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[27 Jun 2009 10:32 AM]



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