खोई चाबी कि तरह खुशियाँ ज़मीन पर पड़ी....

काहे को ब्याहे बिदेस.... इन्बोक्स में मुट्ठी भर कोतुहूल छुपा दो, दरवाज़े पर धागे से गुलाब कि पंखुडियों कि पुड़िया बांधों जैसे ही वो दरवाजा खोले, उसका चेहरा एक क्लिक में क़ैद कर लो, गर्मी में अपने हिस्से कि छाया और सर्दी में धुप उसके नाम कर दो, आम कि गुठली खुद के लिए और फांकें उ... [पूरी पोस्ट]
writer neera
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[27 Jun 2009 07:58 AM]

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