चाहत की तल्खी नहीं देखी......

कुछ लम्हे दिल से... ए गम - ए - दिल तूने अभी चाहत की तल्खी नहीं देखी सपनों से भरे दिल के अरमानों की अर्थी नहीं देखी बहार - ए - गुलशन को सराहा गया तो बहुत आग शबनम की बूंदों में सुलगती नहीं देखी मिलन के सिलसिले रुखसत हो जाते हैं मगर उन लम्हों की कशिश मिटती नहीं देखी आँख तो... [पूरी पोस्ट]
writer अर्चना तिवारी
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[26 Jun 2009 13:52 PM]

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