कभी आ कर तो देखो

कच्‍चा चिट्ठा रस्में पुरानी ही सही, पांव की बेड़ियां ही सही हो कर दूसरों के, रस्में निभाकर तो देखो तुम्हारी थी दुनियाँ तुम्हारी ही है दुनियाँ हमें भी कभी दुनियाँदारी सिखा कर तो देखो खुली हवा में सांस ले ली, मेड़ों मे अठखेलियां कर ली अब बंद है आशियाना, इसमें समा कर... [पूरी पोस्ट]
writer मथुरा कलौनी
views
22
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
3
[26 Jun 2009 12:46 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix