फांसी चढऩे वाले सेनानी वारिस अली

रिपोर्ताज अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ 1857 में जहां मेरठ और दिल्ली में सिपाही विद्रोह के जरिये स्वाधीनता संग्राम की लपटें धधकने को बेताब थीं, वहीं तिरहुत की जमीन भी आजादी के लिए मचल रही थी। यहां के सपूतों में भी अंग्रेजों के खिलाफ नफरत और असंतोष के बीज पनप चुके थ... [पूरी पोस्ट]
writer एम. अखलाक

स्वाधीनता संग्राम

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[04 Jun 2009 03:29 AM]

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