लोकतंत्र का यह कैसा एकतरफा समझोता !

Meri Abhivyakti जब भी कोई संस्था अथवा संगठन अथवा व्यक्ति किसी संस्था अथवा व्यक्ति को अपने कार्यों को संपादित करने एवं व्यवस्थाओं को बनाए रखने की जिम्मेदारी सौपती है तो उनके बीच दो पक्षीय समझोता होता है और तय मापदंड और शर्तों के आधार पर कार्य करने को राजी होते हैं ।... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक कुमार भानरे
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[26 Jun 2009 01:34 AM]

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