तुम्हारी विरासत
तुम्हारी विरासत बची हुई जिंदगी का एक टुकड़ा है मेरे पास। इसे मैं अंधेरे से छीन कर लाई हूं। देर तो हो गई है, सन्नाटा कितना ही भयानक हो उसमें भटकते स्मृतियों के पदचाप, अपनी आहट से हमें जगा देते हैं। इसमें फूटेंगी सुबह की किरने। मुस्कराती कोंपलों से यह...
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उषा वर्मा
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[25 Jun 2009 18:47 PM]



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