देवितमे मा जलधाराओ, गगन गुहा से रस बरसाओ ……
ज्ञानदत्त जी के आदेश पर कोलकाता के हमारे अत्यंत प्रिय वरिष्ठ कवि-गीतकार दादा छविनाथ मिश्र का एक और ऋचागीत प्रस्तुत है, जल की अभ्यर्थना का गीत : ( शं नो देवीर अभिष्टय
आपो भवन्तु पीतये ।
शं योर अभिस्रवन्तु नः )
– ऋग्वेद संहिता : १०/९/४ पृथ्वी का...
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PRIYANKAR
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[25 Jun 2009 15:54 PM]



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