फासला

पंजाबी लघुकथा धर्मपाल साहिल किसी कैदी के जेल से छूटने की तरह, वह भी विभाग द्वारा लगाए गए एक माह के रिफ्रेशर कोर्स से फ़ारिग होकर, अपने परिवार के पास उड़ जाना चाहता था। घिसे-पिटे से बोर लेक्चर। बेस्वाद खाना। अनजान साथी। बेगाना शहर। फुर्सत के क्षणों में उसे अपने सात... [पूरी पोस्ट]
writer दीपशिखा
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[25 Jun 2009 09:47 AM]

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