मध्‍यावधि मुख्‍यमंत्री

कछु ह‍मरी सुनि लीजै बचपन की बात है। अपनेराम खेलते खेलते दौडकर उस कमरे में जा पहुंचे जहां चटाई पर बैठे पिताश्री चाय पी रहे थे। भरा हुआ चाय का कप जमीन पर रखा था जिस पर ठोकर लगी और सारी चाय बिखर गई। कपप्‍लेट के टुकडे दूर तक फैल गए। यह देखकर पिताश्री चाय से भी ज्‍यादा गरम ह... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. कमलकांत बुधकर
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[25 Jun 2009 08:34 AM]

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