कलाकार की व्यक्तिगत ईमानदारी: दो
बात चल रही थी आलोचना और काव्य पर। यशराज न जाने किस बात पर चीखकर टेबल पर घूँसे मारन लगा और बोला, ”हाँ, आलोचना में फ्राॅड होता है, किन्तु काव्य में भी होता है। एक तो फ्राॅड जान-बूझकर किया जाता है अर्थात् काव्य में लेखक जो दृष्टि अपनाता है वह उसकी अन्तर...
[पूरी पोस्ट]
रंगनाथ सिंह
17
1
0
1
2
[25 Jun 2009 07:18 AM]



Shuffle








