सब कुछ है गांधीमय (रिंग, रिंग रिंगा भाग तीन)

दिमाग की हलचल मैं आजादी के बाद की बात कर रहा हूं। उससे पहले भले ही गांधीजी का जीवंत करिश्‍मा रहा होगा लेकिन इसके बाद कैश कराने की प्रवृत्ति के चलते सबकुछ गांधीमय हो चुका है। गांधी टोपी पहनी तो इसलिए कि गांधीजी ने कहा है और उतारकर रख दी तो इसलिए कि गांधीजी खुद नंगे... [पूरी पोस्ट]
writer सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi

Politics

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[24 Jun 2009 16:44 PM]

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