उस्ताद अली अकबर खां – विनम्र श्रद्धांजली

दिलीप के दिल से पिछले दिनों संगीत के इस जाजम पर कुछ नही लिख पाया. यही कहूंगा कि संगीत पर लिखना या किसी बात पर भी अपनी राय देना तभी संभव है, जब आप मन से उसमे रमे हुए हो.  यह ब्लोग मैं अपने दिल की कलम से लिखता हूं, और पिछले दिनों उसकी स्याही जैसे सूख ही गयी थी. ख... [पूरी पोस्ट]
writer दिलीप कवठेकर

मन्ना डे

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[24 Jun 2009 14:28 PM]

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