मन जिसका जैसा रहे, वैसा देखे आँख (~जयंत)
मन जिसका जैसा रहे , वैसा देखे आँख , कूड़े सी ताते दिखे , स्वर्ण मुद्रिका लाख ॥ - मन के भावों ने अनुसार , द्रष्टिकोण भी बदल जाता है ॥ संसार में प्राणी को वोही दिखाई देता है जो वो देखना चाहता है ॥ जिसके मन में गन्दगी है , उसे स्वर्ण का ढेर ( याने गुणों...
[पूरी पोस्ट]
Jayant Chaudhary
27
3
0
3
3
[24 Jun 2009 12:31 PM]



Shuffle








