मन जिसका जैसा रहे, वैसा देखे आँख (~जयंत)

Jayant Chaudhary मन जिसका जैसा रहे , वैसा देखे आँख , कूड़े सी ताते दिखे , स्वर्ण मुद्रिका लाख ॥ - मन के भावों ने अनुसार , द्रष्टिकोण भी बदल जाता है ॥ संसार में प्राणी को वोही दिखाई देता है जो वो देखना चाहता है ॥ जिसके मन में गन्दगी है , उसे स्वर्ण का ढेर ( याने गुणों... [पूरी पोस्ट]
writer Jayant Chaudhary
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[24 Jun 2009 12:31 PM]

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