तुम्हारी दुनिया में इस तरह

असुविधा सिंदूर बनकर तुम्हारे सिर पर सवार नहीं होना चाहता हूं न बिछुआ बन कर डस लेना चाहता हूं तुम्हारे कदमों की उड़ान को चूड़ियों की जंजीर में नहीं जकड़ना चाहता तुम्हारी कलाईयों की लय न मंगलसूत्र बन झुका देना चाहता हूं तुम्हारी उन्नत ग्रीवा जिसका एक सिरा बंधा ही... [पूरी पोस्ट]
writer अशोक कुमार पाण्डेय

तुम्हारे लिए

views
40
upvote
10
downvote
0
rating
10
comments
15
[24 Jun 2009 10:44 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix