भाग्य की तलाश

कवितायन भाग्य, को तलाशा मैंने अपनी हथेलियों पर फिर उन रेखाओं में खोजा जो मेरे बचपन की किसी तस्वीर में तो हैं फिलहाल नदारद शायद घिस आई हैं भाग्य, को फिर तलाशा मैंने पेशानी पर सलवटों में छिपी परेशानियाँ मिली उलझनों की इबारत में दर्ज चिंतायें मिली वो लकीरें जो... [पूरी पोस्ट]
writer मुकेश कुमार तिवारी
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[24 Jun 2009 09:56 AM]

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