हिंदी के पारस पत्थर

मन की बात मुझे उसके पिता के बारे में पता नहीं था, पर उसके भाई को मैं जानता था. बचपने में ही सही मैंने उस पर एक लम्बी कविता लिखी थी. उसे देख मैं आज भी गहरीर् ईष्या में डूबने-उतराने लगता हूँ. उसका लिखा हुआ कोई महान साहित्य होगा, स्वयं वह भी इस बात पर शायद ही इत्... [पूरी पोस्ट]
writer Atmaram Sharma
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[24 Jun 2009 08:46 AM]

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