मुरली तेरा मुरलीधर 8
संश्लेशित जीवन मधुवन को खंड खंड मत कर मधुकर मधुप दृष्टि ही सृष्टि तुम्हारी वह मरुभूमि वही निर्झर तुम्हें निहार रहा स्नेहिल दृग सर्व सर्वगत नट नागर टेर रहा आनन्दतरंगा मुरली तेरा मुरलीधर।।51।। साध न कुछ बस साध यही साधना साध्य सच्चा मधुकर यह सच्ची चेतना...
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हिमांशु । Himanshu
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[24 Jun 2009 05:36 AM]



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