नए शेर ......

kavideepakgupta ज़माने में बिना मतलब के मतलब कौन रखता है किसी के ज़ख्म पे मरहम भला अब कौन रखता है वो इक विश्वास ही तो है उसे मानो न मानो तुम फ़लक पे ये उजाला और ये शब् कौन रखता है ये मेरी ज़िन्दगी के रास्तों पे उलझनें हर पल मैं तुझसे पूछता हूँ तू बता रब, कौन रखता है... [पूरी पोस्ट]
writer kavideepakgupta
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[24 Jun 2009 03:37 AM]

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