कब आओगे मेघ और फिर कब बरसोगे

HINDI KAVYA MANCH राह तकत नयना थके, सतत जोहते बाट |माह अषाढ़ भी जा रहा , नहीं आई बरसात ||तपन नहीं अब सहन है , अब आये मानसून | छींटे भी दुर्लभ हुए, बीत चला है जून || चार माह से कृपा बहुत , हे रवि तुमरा तेज़ | रात हुए भी चुभत है , गरम गरम यह सेज || नहीं चैन दीखत कहीं ,... [पूरी पोस्ट]
writer प्रदीप मानोरिया
views
14
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
12
[24 Jun 2009 00:32 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix