माँ के गहने
मैं बहुत छोटी थी जब घर में सेंध लगी थी। गर्मी के दिन थे। सभी लोग छत पर सो रहे थे। सुबह जब नीचे उतर कर आए तो देखा हमारा कमरा अन्दर से बन्द था। दरवाजे की झिरी से झांककर देखा, अन्दर काफी रोशनी थी और पूरा कमरा अस्त-व्यस्त था। समझते देर न लगी कि [...]...
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satyanshu
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[23 Jun 2009 11:19 AM]



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