नव बरखक बहाने- कुन्दन कुमार मल्लिक
इ की भेल, अनचोँकहि मे नीन टूटल बाहर पट्टखाक शोर छल करैत लोक अनघोल छल तखन बुझना मे आयल इ त’ स्वागत करैत नव बरखक बोल छल केओ नव वसन मे चमकैत केओ मदिरा सँ बहकै त’ केओ सुन्दरी संग नाचैत ओहि मोहल्ला मे एकटा घर एहनो छल जतहि ने कोनो शोर छल नहि कोनो अनघोल छ्ल...
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कुन्दन कुमार मल्लिक
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[23 Jun 2009 03:25 AM]



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