पापा...

मीत जब माँ बचपन में, डांट देती थी.. तुम्ही तो दुलारते थे, पापा... जब भागते-भागते में, खा जाता था ठोकर, तुम ही तो सँभालते थे, पापा... जीवन का हर सुंदर क्षण, तुम्हारा ही तो, कर्जदार है! पापा... पर पापा...? आज जब तुमको, मेरी जरुरत... तो.. में लाचार हूँ पापा... [पूरी पोस्ट]
writer मीत
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[23 Jun 2009 02:48 AM]

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