समझने योग्य

I'm Vikash & this is my world...! मुझे तुम्हारे कंक्रीट के जंगल से कोई शिकायत नहीं और ना ही नफ़रत है तुम्हारे लगाव से. और ना ही गुस्सा हूँ तुम पर, तुम्हारे चुनाव से. लेकिन मैं ये पेड़-पौधे, ये दूब, ये कांटे नहीं छोड़ पाऊँगा जो कुछ जन्म से मेरा है, प्राकृतिक है वो जमीनी बंधन ’मैं’ नही... [पूरी पोस्ट]
writer विकास कुमार

मेरी कविताएँ

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[23 Jun 2009 02:11 AM]

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