मुंबई में अब कहां बची है खुली जगह

मनोज बाजपेयी शाम को टहलने निकला तो बहुत अच्छा लग रहा था। आज पहली बार यहां रहते हुए सुंदर से पार्क में अलग अलग से चेहरों को देखते हुए, उनकी गतिविधियों और हावभाव को निहारते हुए अपनी वॉक पूरी कर रहा था। यहां ठीक मेरी बिल्डिंग के सामने टहलने के लिए एक बहुत ही कम जगह... [पूरी पोस्ट]
writer Manoj Bajpayee

हिंसा

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[23 Jun 2009 00:35 AM]

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