इंतज़ार

हिमाल : अपना-पहाड़ वक्त है... चलने दो उसकी आज नहीं तो कल ही सही कर लूंगा इंतज़ार सदियों तक देखूंगा राह बस एक बार कह दो आओगी तुम... एक दिन सौ साल बाद मेरे लिए ।।... [पूरी पोस्ट]
writer जितेंद्र भट्ट

मेरी रचना

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[22 Jun 2009 23:57 PM]

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