समीर लाल ’उड़नतश्तरी’ जी नवगीत की पाठशाला में
अपने समीर लाल जी का गीत ’द्वारचार कर जाती गरमी’ नवगीत की पाठशाला में प्रकाशित हुआ है. गीत के बोल, उसके भाव और प्रवाह प्रभावित करता है. समय मिले, तो जरुर पढ़ें और कोई गुनगुना सके तब तो आनन्द ही आ जायेगा. समीर लाल जी समीर लाल जी के नित नये रंग देखने मिल...
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संजय तिवारी ’संजू’
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[22 Jun 2009 21:23 PM]



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