याद बहुत आते हैं मुझको
वो सपनीले दिन याद बहुत आते हैं मुझको खट्टी मीठी बातों वाले अमियों वाले दिन कैसी धूप कहाँ का जाड़ा सर पर लू की चादर ओढे सखी सहेली के घर जाना बात - बात पर हँसने वाले टीस जगा जाते हैं अक्सर बचपन वाले दिन गली मुहल्ला एक बनाते बारी से सबके घर जाते उनकी रसो...
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Deepa Pant
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[22 Jun 2009 10:25 AM]



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